BJP सरकार का ‘ऑडिट ड्रामा’ हुआ बेनकाब!

अजमल शाह
अजमल शाह

दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा सरकार के दावों की विधानसभा के अंदर ही पोल खोल दी है. “फीस वापस कराई जाएगी” का जो भरोसा पैरेंट्स को दिया गया था, वह अब काग़ज़ों में भी मौजूद नहीं दिख रहा. यह दावा नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्री आशीष सूद के लिखित जवाबों से निकला तथ्य है—ऐसा कहना है AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का.

विधानसभा के जवाबों ने खोला सच

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में शिक्षा मंत्री ने खुद मान लिया कि पिछले सत्र में बढ़ाई गई फीस किसी भी प्राइवेट स्कूल ने वापस नहीं की. यानी महीनों तक चला ऑडिट, बयानबाज़ी और आश्वासन—सब एक राजनीतिक दिखावा साबित हुआ.

ऑडिट हुआ, एक्शन गायब

सरकार ने बताया कि कुल 1624 निजी स्कूलों का ऑडिट कराया गया. लेकिन जब सवाल उठा कि इनमें से कितने स्कूलों में मुनाफाखोरी या वित्तीय गड़बड़ी पाई गई, तो जवाब आया—“प्रक्रिया जारी है”.
यही जवाब तब भी मिला जब पूछा गया कि कितने स्कूलों पर नोटिस, जुर्माना या मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई हुई.
साफ़ शब्दों में कहें तो—ऑडिट का शोर बहुत, नतीजा शून्य.

सरकार के पास डेटा ही नहीं!

सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब शिक्षा मंत्री ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि 2025–26 में फीस बढ़ाने वाले स्कूलों की कोई सूची सरकार के पास मौजूद नहीं है.
यानि सरकार को यह तक नहीं पता कि किस स्कूल ने कितनी फीस बढ़ाई, फिर फीस वापसी का दावा किस आधार पर किया गया?

DPS द्वारका मामला और FIR का सवाल

DPS द्वारका में फीस न देने पर छात्रों को लाइब्रेरी में बैठाने, बाउंसर तैनात करने और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों पर भी सरकार सवालों से बचती दिखी.
DM की अध्यक्षता वाली कमेटी ने FIR दर्ज करने की सिफारिश की थी, लेकिन शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है—जबकि कोर्ट ने FIR पर कोई रोक नहीं लगाई.

‘ऑडिट’ या ‘ऑडियंस मैनेजमेंट’?

AAP का आरोप है कि भाजपा सरकार का पूरा मॉडल “ऑडिट नहीं, ऑडियंस मैनेजमेंट” पर टिका है—पैरेंट्स को शांत करने के लिए वादे, लेकिन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई में ज़ीरो टॉलरेंस नहीं, बल्कि ज़ीरो एक्शन.

सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, यह साफ हो चुका है कि दिल्ली सरकार ने न एक भी स्कूल से फीस वापस कराई न किसी पर कार्रवाई की और न ही छात्रों के शोषण पर FIR दर्ज कराई।

दिल्ली के अभिभावकों के लिए यह सिर्फ़ एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि सीधे जेब और बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है.

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